मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश, सरकार को आखिरी मोहलत
जबलपुर। प्रदेश सरकार की नई मार्गदर्शिका के आधार पर किए गए पांच ग्राम रोजगार सहायकों के तबादलों पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि अगली सुनवाई तक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो जवाब देने का अधिकार स्वतः समाप्त माना जाएगा। मामले की अगली सुनवाई अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में निर्धारित की गई है। अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि सरकार नई मार्गदर्शिका पर क्या रुख अपनाती है और कोर्ट इस पर क्या अंतिम निर्देश देता है।
तीन बार अवसर, फिर भी जवाब नहीं
कोर्ट ने बताया कि 19 अगस्त को नोटिस जारी होने के बाद राज्य सरकार को तीन बार जवाब दाखिल करने का अवसर दिया गया, लेकिन अब तक कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए बेंच ने अंतरिम आदेश पारित किया।
23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों पर पड़ेगा असर
हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश का असर प्रदेशभर में कार्यरत लगभग 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों पर पड़ेगा। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि नई मार्गदर्शिका के जरिए सेवा शर्तों और स्थानांतरण संबंधी प्रावधानों में बदलाव कर उनकी नियुक्ति की मूल संरचना को प्रभावित किया जा रहा है।
रोजगार सहायकों ने लगाई याचिका
यह याचिका जुलाई 2025 में सिंगरौली के अमित कुमार मिश्रा, शहडोल के शिवकांत मिश्रा, सागर की रानू राजपूत, टीकमगढ़ के अभिषेक पटेरिया और शहडोल के राकेश कुमार लश्कर द्वारा दायर की गई। सभी आवेदक अपने-अपने जिलों की ग्राम पंचायतों में ग्राम रोजगार सहायक के पद पर कार्यरत हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई गाइडलाइन के माध्यम से मूल ग्राम पंचायत में नियुक्ति के अधिकार को बदला जा रहा है, जो उनके सेवा अधिकारों के विपरीत है।
सरकार के रुख पर आपत्ति
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से समय मांगे जाने पर याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता गोपेश यश तिवारी ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि सरकार की इस देरी से प्रदेशभर के ग्राम रोजगार सहायकों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, जो अवैधानिक है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-28473-2025
